सकुन चैन की जिन्दगी थी सबकी.
किलकारिया,हंसी थी अबकी.
अचानक मुसीबतों का धमाल हो गया.
अब ये नीला उफान लाल हो गया.......
कई मासूमो का जिन्दगी का काल हो गया,
रोजी रोटी जिनका था सहारा.
वो जगह था समुन्द्र का किनारा.
बेकारी,भुखमरी का वहा जाल हो गया.
अब ये नीला उफान लाल हो गया.......
कई मासूमो का जिन्दगी का काल हो गया,
सैलानियों के सैर का संसार था.
पर्यटन का अनोखा भंडार था.
उनके लिए अब ये बुरा साल हो गया.
अब ये नीला उफान लाल हो गया.......
कई मासूमो का जिन्दगी का काल हो गया,
दाना और दवाई के लिए,
पानी और कमाई के लिए.
युवतियों का सस्ता खाल हो गया.
अब ये नीला उफान लाल हो गया.......कई मासूमो का जिन्दगी का काल हो गया.
कुनामी ये सुनामी,ढाया ऐसा कहर.
जहा थी अमृत की छाया, पड़ा वहा जहर.
समुन्द्र का हिला स्तर, तो मौत का चाल हो गया.
अब ये नीला उफान लाल हो गया.......
कई मासूमो का जिन्दगी का काल हो गया.हरिस कहे, हाथ जोड़ के हरि से,
बिछड़ो को मिला फिर से.
फिर जिंदगी में ऐसी कमाल हो जाये.
और बूढ़ा, बच्चा फिर से निहाल हो जाये.
अब इस नीले उफान का हलाल हो जाये.
हरिकेश कुमार यादव
No comments:
Post a Comment