Sunday, August 26, 2018

व्यथा मन की

क्या सुनाऊ व्यथा मन की।
कथा जन जन की।।

भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।
सारे लोग अपने धरम पर है।।

हर बात को राजनीति से जोड़ रहे है।
जननीति की कमर तोड़ रहे है।

आकर कोई तो संभाले इस बागडोर को


Monday, November 12, 2012

दिवाली कि बहुत बहुत बधाई 13/11/2012.

दिवाली कि  बहुत बहुत बधाई 13/11/2012.

Sunday, May 13, 2012

जिंदगी एक रेल है।

जिंदगी एक खेल है,
ये चलती एक रेल है।.
रुक जाये तो फेल है।
नहीं तो ये जेल है।
खुशनुमा रहे तो मेल है।
चिकना हो जाये तो तेल है।. 

Monday, April 2, 2012

जिंदगी क्या है ? हरिकेश हरिस


जिंदगी क्या है ?
सोचो जरा.

हवा का एक झोका.
दिखता नहीं एहसास होता है.

पानी का एक बुलबुला.
उठता है पर मिलता नहीं.

आग की ज्वाला.
पकड़ में आता नहीं, मगर जला जाता है.

एक सोच.
जो हम सोच पाते नहीं.

एक विचार.
जो हम कर पाते नहीं.

एक समस्या.
जो हम सुलझा पाते नहीं.

एक ख़ुशी .
जो हम मना पाते नहीं.

एक गीत.
जो हम गा पाते नहीं.

जिंदगी क्या है..सोचो जरा... हरिकेश हरिस

Sunday, January 1, 2012

नए साल 2012

नए साल की बहुत बहुत बधाई. ये नया साल २०१२ सबके जीवन में एक नयी उमंग एक नयी तरंग एक नयी दिशा ले के आये. आज बहुत दिनों के बाद मै अपनी ब्लॉग लिख रहा हूँ.
मेरे पास आज कल समय की कमी है, इसलिए मै कुछ लिख नहीं पा रहा हूँ. वैसे तो लिखने को बहुत कुछ पड़ा है जो मै लिखना चाहता हूँ .


Harikesh
01012012-08.05pm

Thursday, October 20, 2011

मेरा भी कुछ लिखने को जी करता है.

मेरा भी कुछ लिखने को जी करता है.
किसी की कहानी,
किसी की जुबानी,
किसी की कविता,
तो किसी का वर्णन.
जब लिखने बैठता हूँ  तो शब्द खो जाते है.. और कभी अचानक ही एसे शब्द निकल जाते है, मै खुद ही अपना लिखा हुआ पढ़ कर कहता हूँ. क़ि क्या गजब लिखा है. पता नहीं ये कहा से सिखा है.
बहुत  ही  सुन्दर  सुन्दर  विचार  मेरे  मन में  आते  है.और जब भी लिखने जाऊ  तो पता नहीं कहा खो जाते है..
 हर  दम  पेन  और  डायरी  पास  नहीं  होती  है .. मेरी  कल्पनाये  बस  यू ही  खोती है...मेरा  लिखा  कोई  न पढ़े  , इसका  मुझे  मलाल  नहीं. जब  कोई  पढ़  ले  तो  उसके  पास  फिर  कोई  सवाल  नहीं..