एक शायर को शायरी मिल गयी
दर्दे दिल की डायरी मिल गयी
जो हम न कर सके वो मेरे नौशाद कर गए'
मेरे जख्मो पर मरहम भर गए!
"हरिकेश"
दर्दे दिल की डायरी मिल गयी
जो हम न कर सके वो मेरे नौशाद कर गए'
मेरे जख्मो पर मरहम भर गए!
"हरिकेश"
मै एक बहुत ही साधारण व्यक्ति हूँ, मै 2005 में इलाहाबाद कृषि संस्थान मानद विश्वविधालय से कृषि में ऍम बी ए की डिग्री हासिल की.2003 में गोरखपुर विश्वविधालय से कृषि में स्नातक की डिग्री हासिल की. फ्यूचर ग्रुप में 2005 से प्रबंधक के रूप में कार्य कर रहा हूँ . थोड़ी बहुत लिखने की शौक है जो कभी कभी पूरा कर लेता हूँ.
