Saturday, May 21, 2011

एक शायर को शायरी मिल गयी

एक शायर को शायरी मिल गयी


दर्दे दिल की डायरी मिल गयी

जो हम न कर सके वो मेरे नौशाद कर गए'

मेरे जख्मो पर मरहम भर गए!

"हरिकेश"

परम प्यार में बेवफाई ना करना.


तुम्हे देख कर मै जीता रहा हूँ,
जिंदगी के सारे गम पीता रहा हूँ
उज्जाले में अँधेरे कि परछाई ना करना,
परम प्यार में बेवफाई ना करना.


तेरी ख़ुशी के लिए अपना गम छुपाता रहा हूँ.
जिंदगी के लम्हों को यू ही बिताता रहा हूँ .
समुंदर में रेत कि दुहाई ना करना ,
परम प्यार में बेवफाई ना करना.


तुम्हारे सपनों को हकीकत बनता रहा हूँ ,
कोई रहे ना कसर ये दिखता रहा हूँ.
धरती से चाँद कि फरमाईस ना करना,
परम प्यार में बेवफाई ना करना .

"हरिकेश"