Monday, December 13, 2010

10 दिसम्बर 10 भूल ना सकेंगे

10 दिसम्बर 10 लिए ऐसा रहा कि हम भूल ना सकेंगे। पता नहीं जिन्दगी में कैसा समुंदरी तूफान आज के दिन आया और सब कुछ ले कर चला गया.हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाए। जैसे प्यास लगी हो और समुन्द्र के पास रह कर भी प्यास ना बूझे। देखने के लिए सब कुछ अपने पास था लेकिने पाने के लिए कुछ भी नहीं था। आशाओ और उमीदो पर पानी फिर गया हो ऐसे लग रहा था। जून-२००६ से हम अपने आप को एक नयी सोच के साथ जी रहे थे.लेकिन मेरे सोच को १० दिसम्बर-१० को एक ग्रहण लग गयी जो शायद कभी भी ना हटे। मेरे आँखों में आंसू सोच में पुरानी बाते हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। मै अपने आप को कैसे संभाल रहा हूँ मै ये बया नहीं कर सकता।